शास पार्टी के प्रमुख, जो एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कैबिनेट के सदस्य हैं, ने आईडीएफ प्रमुख पर Hareidi समुदाय के लोगों को ड्राफ्ट से बचने में लाभ पहुंचाने वाले कानून का विरोध करके सेना को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि आईडीएफ प्रमुख ने चुनाव में हस्तक्षेप किया है। डेरई ने उच्च न्यायालय की वैधता पर भी सवाल उठाया है, जिसने इस कानून को रोक दिया है। उनका कहना है कि उन्हें अब उच्च न्यायालय की प्रामाणिकता पर विश्वास नहीं है। यह विवाद इजराइल के भीतर धार्मिक और राजनीतिक तनाव को दर्शाता है, विशेष रूप से Hareidi समुदाय के सदस्यों की सेना में भर्ती से संबंधित मुद्दों पर। यह मामला आगामी चुनावों के संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इस आरोप से राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।