डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन पर स्पेन को शेंगेन सहयोग से बाहर करने की धमकी देने के बजाय, एक मजबूत नेतृत्व प्रदर्शित न करने का आरोप लगा है। लेखिका, कैरोलिना मैगडालीन मायर के अनुसार, डेनमार्क को अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर स्पेन की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए सहायता और समर्थन प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए थी। फ्रेडरिकसेन का यह कदम लोकलुभावनवादी राजनीति का उदाहरण है, जो वास्तविक नेतृत्व से कमतर है। इस तरह के रवैये से यूरोपीय संघ के भीतर एकजुटता और सहयोग की भावना कमजोर होती है। लेखिका का तर्क है कि किसी भी सदस्य देश पर बाहरी आक्रमण होने पर, सभी देशों को मिलकर उसका समर्थन करना चाहिए। डेनमार्क के इस रुख को शर्मनाक बताया गया है, क्योंकि इससे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उसकी छवि धूमिल हुई है। यह घटनाक्रम यूरोपीय संघ के मूल्यों और सिद्धांतों पर सवाल खड़े करता है।

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