डेनमार्क द्वारा खरीदे जाने वाले नए एफ-35 लड़ाकू विमानों की लागत में अनुमान से लगभग 2 अरब यूरो की वृद्धि हुई है। यह लागत वृद्धि देश के रक्षा बजट पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगी। सरकार ने इस लागत में हुई वृद्धि के लिए स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन विपक्ष ने बजट नियोजन में पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। इस मामले से रक्षा परियोजनाओं की लागत का अनुमान लगाने और प्रबंधन करने की प्रक्रियाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मुद्रास्फीति के कारण लागत में वृद्धि हुई है। डेनमार्क सरकार अब इस स्थिति से निपटने के लिए विकल्पों पर विचार कर रही है। इस वृद्धि के कारण विमानों की डिलीवरी में भी देरी हो सकती है।