डेनमार्क ने अपनी सैन्य सेवा की अवधि को बढ़ाकर 11 महीने कर दिया है, जो पहले केवल चार महीने थी। यह निर्णय वैश्विक स्तर पर बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के जवाब में लिया गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड पर दावे ने इस फैसले को प्रभावित किया है। डेनमार्क का मानना है कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में मजबूत सैन्य तैयारी आवश्यक है। यह कदम देश की सुरक्षा को मजबूत करने और संभावित खतरों का सामना करने की क्षमता को बढ़ाने के लिए उठाया गया है। Reuters के अनुसार, यह बदलाव वैश्विक स्थिति में कठोरता को दर्शाता है। यह निर्णय डेनमार्क की सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।