दिल्ली पुलिस ने दिप्के और नागरिकता अधिकार मंच (CJP) के नेताओं को हिरासत में लेने के लिए महिला पुलिसकर्मियों को चुना, जिसके पीछे कई संभावित कारण हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति जानबूझकर की गई थी ताकि विरोध प्रदर्शनकारियों के साथ टकराव को कम किया जा सके और अनावश्यक बल प्रयोग से बचा जा सके। महिला पुलिसकर्मियों की उपस्थिति से प्रदर्शनकारियों में उत्तेजना कम होने की संभावना थी, जिससे स्थिति को नियंत्रण में रखना आसान हो जाता। यह भी संभव है कि पुलिस ने यह निर्णय लिंग संवेदनशीलता को प्रदर्शित करने और अपने दृष्टिकोण को अधिक मानवीय दिखाने के लिए लिया हो। इस कदम की सराहना भी की जा रही है क्योंकि इससे पुलिस की छवि सुधारने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कुछ लोगों का तर्क है कि यह रणनीति केवल एक दिखावा थी और इसका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को भ्रमित करना था।

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