रक्षा मंत्री द्वारा प्रेसोव अस्पताल के खर्च को लेकर किए गए दावों में विरोधाभास सामने आया है। हाल ही में, मंत्री ने अस्पताल के खर्च को लेकर जो आंकड़े दिए थे, उनमें अब बदलाव किया जा रहा है। यह बदलाव बढ़ते दबाव के बीच किया गया है, जिससे अस्पताल के खर्च को लेकर संदेह और बढ़ गया है। मंत्री के पहले के बयानों और अब दिए जा रहे आंकड़ों में अंतर है, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह अस्पताल परियोजना महंगी साबित हो सकती है और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हो सकता है। इस मामले में आगे जांच की मांग की जा रही है ताकि खर्च में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, सरकार पर स्पष्टीकरण देने का दबाव बढ़ रहा है।