1970 के दशक से जुड़े एक यौन शोषण मामले की सुनवाई में जूरी कोई फैसला देने में विफल रही है। केरी नामक व्यक्ति पर लगे आरोपों पर जूरी सदस्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई। अदालत में पीड़ित भाई-बहनों की यादों में विरोधाभास सामने आया, जिससे मामले की जटिलता बढ़ गई। अभियोजन पक्ष ने केरी पर बचपन में यौन शोषण करने का आरोप लगाया था, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताया। जूरी के अनिर्णायक फैसले के बाद, अभियोजकों को यह तय करना होगा कि वे मामले को फिर से पेश करना चाहते हैं या नहीं। इस मामले ने दशकों पुराने यौन शोषण के आरोपों की जांच और न्याय दिलाने की चुनौतियों को उजागर किया है। आगे की कार्यवाही अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी।
