‘श्री बिज्जो भूत’ नामक नाटक स्थानीय लोककथाओं, हास्य और संगीत का मिश्रण है। यह नाटक अनुपस्थिति और लालसा की कहानी कहता है, और यह सवाल उठाता है कि समाज पुरुषों और महिलाओं को अलग ढंग से कैसे आंकता है। नाटक एक बेटी की खोज और उसकी माँ के इंतज़ार के इर्द-गिर्द घूमता है। यह कहानी रिश्तों की जटिलताओं और सामाजिक मानदंडों पर प्रकाश डालती है। नाटक दर्शकों को विचार करने के लिए मजबूर करता है कि हम दूसरों को कैसे देखते और आंकते हैं। यह एक मार्मिक और विचारोत्तेजक प्रस्तुति है जो भावनाओं को छूती है। यह नाटक समाज में व्याप्त पूर्वाग्रहों पर भी सवाल उठाता है।

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