आधुनिक युग में डेटा की मात्रा में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह वृद्धि व्यक्तिगत अनुभवों को कम कर सकती है। डेटा, अनुभव के विपरीत, वस्तुनिष्ठ और विश्लेषणात्मक होता है। यह भावनात्मक और संवेदी जुड़ाव प्रदान नहीं करता जो जीवन को सार्थक बनाते हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा पर अत्यधिक निर्भरता से भविष्य में जीवन नीरस और घटनाओं से रहित हो सकता है। यह प्रवृत्ति व्यक्तिगत विकास और मानवीय संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। डेटा और अनुभव के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
