सरकार ने डेटा सेंटर में निवेश को लेकर उठने वाले सवालों पर रिपोर्ट से कुछ विवादास्पद अंश हटा दिए हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट में, डेटा सेंटर के सतत निवेश पर प्रश्न उठाए गए थे, लेकिन सार्वजनिक रूप से जारी किए गए अंतिम संस्करण में ये हिस्से शामिल नहीं थे। रिपोर्ट से हटाए गए अंशों में परिवहन या आवास जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की तुलना में डेटा सेंटर को प्राथमिकता देने से जुड़ी चिंताओं को व्यक्त किया गया था। इस संशोधन से पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार डेटा सेंटर उद्योग का समर्थन करने के लिए उत्सुक है, भले ही इसका मतलब अन्य आवश्यक परियोजनाओं की अनदेखी करना हो। सरकार ने अभी तक इन आरोपों का जवाब नहीं दिया है। इस घटना से डेटा सेंटर निवेश नीतियों और सरकारी रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं पर बहस छिड़ सकती है।