डेनमार्क की राजनीति में एक विवाद उभर कर सामने आया है। राजनेता पिया ओल्सन डायर पर एक ऐसे सलाहकार को नियुक्त करने का आरोप है जिस पर ‘मी टू’ (MeToo) आंदोलन के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। आलोचकों का मानना है कि डायर ने जानबूझकर इस मुद्दे को गर्मियों की छुट्टियों के दौरान दबाने की कोशिश की, ताकि आलोचना कम हो जाए। लेखिका कैरोलिना मैगडालीन मेयर का कहना है कि इस तरह का निर्णय लेना और उसके बाद शांति से सोना, एक गंभीर मामला है। डायर पर आरोप है कि उन्होंने इस नियुक्ति के माध्यम से अपनी संवेदनहीनता और अवसरवादिता का प्रदर्शन किया है। इस मामले ने डेनमार्क में राजनीतिक हलचल मचा दी है और नैतिकता के सवाल खड़े कर दिए हैं। इस नियुक्ति से डायर की छवि को नुकसान पहुंचा है और उनके राजनीतिक भविष्य पर भी असर पड़ सकता है।