डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन वर्तमान में एक विरोधाभासी स्थिति का सामना कर रही हैं। यूरोपीय संघ के स्तर पर उनकी स्थिति काफी मजबूत हुई है और उन्हें एक विजेता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अपने ही देश डेनमार्क में उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है। विशेष रूप से प्रवासन और विदेशी नीति के मोर्चे पर उनकी स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। विडंबना यह है कि उनके नए सरकारी साझेदार अब इस नीति पर उनका समर्थन कम कर रहे हैं। लेखक थॉमस लार्सन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सफलता घरेलू राजनीति में उनकी कमजोरी को नहीं छिपा पा रही है। यह स्थिति उनके नेतृत्व के लिए एक जटिल राजनीतिक संतुलन पैदा करती है।
