जॉन स्टीनहुसेन के मंत्रिमंडल में बने रहने या न रहने का मामला उनके प्रदर्शन से ज़्यादा मतदाताओं को साधने से जुड़ा हुआ लग रहा है। हालांकि, इस निर्णय का अंतिम अधिकार संविधान के अनुसार राष्ट्रपति के पास ही होगा। यह सवाल उठ रहा है कि क्या डेमोक्रेटिक एलायंस (DA) ने ही इस फैसले को आगे बढ़ाया है। स्टीनहुसेन के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो रही हैं, लेकिन राष्ट्रपति ही तय करेंगे कि उन्हें पद पर रहना है या नहीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला पार्टी के भीतर की रणनीति और आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर लिया जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम में राष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें ही अंतिम निर्णय लेना है। यह देखना दिलचस्प होगा कि राष्ट्रपति इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं।
