एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, चेक नागरिक व्यापक बिजली कटौती या ब्लैकआउट को लेकर अधिक चिंतित नहीं हैं। पिछले वर्ष देश के कुछ हिस्सों में हुई ब्लैकआउट के बावजूद, लोगों की तैयारी के स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है। केवल लगभग चालीस प्रतिशत आबादी ही ऐसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के सही तरीकों में सक्रिय रूप से रुचि रखती है। आंकड़ों से पता चलता है कि एक तिहाई से अधिक घरों में 24 घंटे के लिए पीने के पानी का पर्याप्त स्टॉक नहीं है। इसके अलावा, केवल हर आठवें घर के पास बिजली का कोई वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध है। यह जानकारी जून में ऊर्जा कंपनी epet के लिए Ipsos एजेंसी द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण से मिली है। साथ ही, पिछले एक साल में स्थानीय घरों में बिजली कटौती की समस्याओं में कमी दर्ज की गई है।