चेक गणराज्य में एक अध्ययन से पता चला है कि किशोर औसतन प्रतिदिन तीन घंटे से अधिक समय अपने मोबाइल फोन पर बिताते हैं। छोटे बच्चों के लिए माता-पिता द्वारा उपयोग के नियम निर्धारित किए जाते हैं, लेकिन बड़े किशोर अक्सर इन नियमों को दरकिनार कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप, माता-पिता को यह पता नहीं चल पाता कि उनके बच्चे फोन पर कितना समय बिता रहे हैं और वे किस प्रकार की गतिविधियों में संलग्न हैं। यह स्थिति बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर संभावित नकारात्मक प्रभावों के बारे में चिंता पैदा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता को अपने बच्चों के मोबाइल उपयोग के बारे में अधिक जागरूक रहने और संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है। यह अध्ययन डिजिटल युग में बच्चों के पालन-पोषण की चुनौतियों को उजागर करता है। माता-पिता को बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार पर निगरानी रखने और उन्हें सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में शिक्षित करने की सलाह दी जाती है।