तुर्की के अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में चेक गणराज्य का प्रतिनिधित्व केवल सरकारी सदस्यों द्वारा किया जाएगा, राष्ट्रपति पेट्र पावेल द्वारा नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय से राष्ट्रपति भवन द्वारा सरकार के खिलाफ अधिकार क्षेत्र का मुकदमा दायर होने की संभावना बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषक जान कुबाचेक इस संभावित मुकदमे को सकारात्मक नहीं मानते हैं। वहीं, एलेš मिचल सरकार के तर्कों को समझने में असमर्थ हैं। सरकार राष्ट्रपति की अनुपस्थिति को लेकर स्पष्टीकरण देने में विफल रही है, जिससे विवाद उत्पन्न हो गया है। यह निर्णय चेक गणराज्य की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। इस मामले पर आगे राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा है।
