राष्ट्रपति पेट्र पावेल के कार्यालय ने मंगलवार सुबह नाटो शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति के प्रतिनिधिमंडल में शामिल न होने के सरकार के फैसले पर पावेल की प्रतिक्रिया जारी की है। सरकार ने सोमवार को पावेल को जुलाई में अंकारा में होने वाले शिखर सम्मेलन के लिए प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं किया था। राष्ट्रपति पावेल ने पहले ही संकेत दे दिया था कि यदि सरकार उनकी भागीदारी से इनकार करती है, तो वह अधिकार क्षेत्र के लिए मुकदमा दायर करने के लिए तैयार हैं। यह निर्णय राजनीतिक तनाव पैदा कर रहा है, क्योंकि पावेल ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी बयान में इस मामले पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह घटनाक्रम चेक गणराज्य की विदेश नीति और सरकार तथा राष्ट्रपति के बीच संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। पावेल के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं।