चेक प्रधानमंत्री आंद्रेई बाबीश ने बताया है कि उन्होंने राष्ट्रपति पेट्र पावेल को 7 और 8 जुलाई को अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में जाने से रोक दिया। बाबीश के अनुसार, ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि शिखर सम्मेलन में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल होंगे और राष्ट्रपति पावेल के पहले के बयानों के कारण ट्रंप नाराज़ हो सकते थे। बाबीश ने कहा कि वे नाटो सहयोगियों के बीच किसी भी तरह के तनाव से बचना चाहते थे। राष्ट्रपति पावेल ने पहले ट्रंप को लेकर नकारात्मक टिप्पणी की थी। इस फैसले से चेक गणराज्य में राजनीतिक हलचल मच गई है, विपक्ष ने प्रधानमंत्री पर राष्ट्रपति को अपमानित करने का आरोप लगाया है। बाबीश ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी है। यह घटना नाटो के भीतर संबंधों और राजनयिक प्रोटोकॉल के बारे में सवाल उठाती है।