चेक सरकार ने राष्ट्रपति को नाटो शिखर वार्ता में शामिल करने से इनकार कर दिया है, जिससे दोनों के बीच नया विवाद उत्पन्न हो गया है। यह शिखर वार्ता जुलाई में अंकारा में आयोजित की जाएगी। प्रधानमंत्री आंद्रेई बाबीश, जो एक लोकप्रिय पार्टी ANO के नेता हैं, ने राष्ट्रपति की भागीदारी को अस्वीकार कर दिया है। सरकार का यह कदम राष्ट्रपति के साथ पहले से चले आ रहे तनाव को दर्शाता है। इस फैसले से चेक गणराज्य की विदेश नीति में एक नई बहस छिड़ सकती है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच राजनीतिक मतभेद इस इनकार का कारण हैं। इस घटनाक्रम से नाटो शिखर वार्ता में चेक प्रतिनिधिमंडल की संरचना पर भी सवाल उठ रहे हैं।