चेक फुटबॉल टीम के सहायक कोच जारोस्लाव प्लाशिल अपनी फिटनेस को लेकर मज़ाक करते हुए कहते हैं कि उन्होंने संन्यास लेने के बाद वजन कम किया है, न कि बढ़ाया। उनका कहना है कि उन्हें कभी मांसपेशियों की ज़रूरत नहीं पड़ी, न खिलाड़ी के रूप में और न ही अब कोच के रूप में। प्लाशिल की कोचिंग शैली में फ्रांसीसी प्रभाव दिखता है, साथ ही वे कोच ब्रुकनर से भी प्रेरणा लेते हैं। वे अपनी सहजता और अनुभव के बल पर टीम को प्रेरित करने में विश्वास रखते हैं। प्लाशिल का मानना है कि शारीरिक मांसपेशियों से ज़्यादा महत्वपूर्ण खेल की समझ और रणनीति है। वे टीम के माहौल को सकारात्मक बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उनकी यह बात दर्शाती है कि सफलता के लिए शारीरिक क्षमता ही सब कुछ नहीं होती।