समाजशास्त्री डैनियल प्रोकोप ने देश के बढ़ते ऋण को एक बड़ी समस्या बताया है। उन्होंने कहा कि ऋण और उसके रखरखाव की लागत के अलावा, शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी कटौती की जा रही है। चेकिया, OECD देशों की तुलना में शिक्षा पर लगभग ५० अरब कम खर्च करता है। प्रोकोप के अनुसार, रक्षा जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी निवेश कम है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को न केवल बजट घाटे का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बचत भी करनी पड़ रही है। यह स्थिति देश के विकास और भविष्य के लिए चिंताजनक है। प्रोकोप ने इस कटौती को दीर्घकालिक नुकसानदायक बताया है।
