चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री आंद्रेज बाबीश ने जुलाई में अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति पेट्र पावेल की भागीदारी को लेकर संवैधानिक न्यायालय के अस्थायी आदेश का सम्मान किया है, लेकिन उन्होंने इस निर्णय की गति पर आश्चर्य व्यक्त किया है। संसद के अध्यक्ष और SPD आंदोलन के नेता टोमियो ओकामूरा ने न्यायालय को राष्ट्रपति का 'वफादार' बताया है। विपक्षी राजनेताओं ने न्यायालय के कदम का स्वागत किया है और इसका सम्मान करने का आग्रह किया है। राष्ट्रपति पावेल ने भी न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया है। यह मामला राष्ट्रपति पावेल की शिखर सम्मेलन में भागीदारी से संबंधित है और इसने चेक गणराज्य की राजनीति में बहस छेड़ दी है। न्यायालय के इस हस्तक्षेप से राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं, जिसमें समर्थन और आलोचना दोनों शामिल हैं।
