विश्लेषकों के अनुसार, अगस्त महीने में कच्चे तेल की कीमतें सीमित दायरे में ही रहने की संभावना है, लेकिन इसमें गिरावट का रुझान बना रहेगा। भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी और आपूर्ति में सुधार के कारण कीमतों पर दबाव दिख सकता है। वैश्विक स्तर पर मांग में स्थिरता भी कीमतों को सहारा देने में सीमित भूमिका निभाएगी। वर्तमान में, तेल उत्पादक देशों की नीतियों और वैश्विक आर्थिक स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। यदि आपूर्ति में और वृद्धि होती है, तो कीमतों में और गिरावट आ सकती है। हालांकि, किसी भी अप्रत्याशित भू-राजनीतिक घटनाक्रम से कीमतों में तेजी भी आ सकती है। कुल मिलाकर, अगस्त में तेल बाजार में सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।