पत्रकारों की सुरक्षा समिति (सीपीजे) ने उन आरोपों का खंडन किया है कि उसने 7 अक्टूबर 2023 के बाद से मारे गए फ़लस्तीनी पत्रकारों के नामों को राजनीतिक दबाव के कारण अपनी सूची से हटा दिया था। समिति ने एक बयान में कहा कि पिछले दो वर्षों में उसे राजनीतिक एजेंडों या पद्धतिगत मतभेदों के कारण नाम जोड़ने या हटाने के लिए भारी दबाव का सामना करना पड़ा। सीपीजे ने स्पष्ट किया कि उन फ़लस्तीनी पत्रकारों के नामों को हटाने का कारण ‘प्रतिरोध से उनके संबंध’ थे। समिति का कहना है कि वह अपनी कार्यप्रणाली और नाम शामिल करने की परिभाषा के आधार पर ही काम करती है। इस मामले में पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश की गई है, लेकिन राजनीतिक दबावों के कारण कुछ निर्णय लेने पड़े। समिति ने अपने दृष्टिकोण को सही ठहराते हुए कहा कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस घटना ने पत्रकारों की सुरक्षा और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के महत्व पर फिर से प्रकाश डाला है।

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