न्यायालय के फैसलों की एक बुनियादी विशेषता उनका सार्वभौमिक अनुपालन है। बार-बार 'स्पष्ट' अधिकारों के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ऐसे संघर्ष, भले ही जीते जाएं, अंततः संस्थानों में विश्वास की कमी को बढ़ाते हैं। यह स्थिति कानूनी निश्चितता को कमजोर करती है और नागरिकों को न्याय प्रणाली पर संदेह करने के लिए प्रेरित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कानूनों का समान रूप से लागू होना ही संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने का एकमात्र तरीका है। यदि हर मामले में अधिकारों के लिए लड़ना पड़े, तो न्याय प्रक्रिया का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। यह न केवल समय और संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि सामाजिक स्थिरता के लिए भी खतरा है। इसलिए, न्यायालय के निर्णयों का सम्मान और पालन करना आवश्यक है ताकि न्याय प्रणाली प्रभावी बनी रहे और नागरिकों का विश्वास बना रहे।
