दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े श्रमिक संघ, Cosatu ने आर्थिक कठिनाई और पलायन के लिए विदेशी संसाधनों के दोहन और स्थानीय स्तर पर मूल्यवर्धन की कमजोरी को दोष दिया है। संघ ने गुलामी और उपनिवेशवाद से जुड़े मुआवज़े की मांग का समर्थन किया है। Cosatu के नेताओं का कहना है कि पश्चिमी देशों द्वारा संसाधनों का शोषण अफ्रीका के विकास में बाधा बन रहा है। उनका मानना है कि स्थानीय उद्योगों को विकसित करने और मूल्यवर्धन करने पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, संघ ऐतिहासिक अन्याय के लिए पश्चिमी देशों से औपचारिक माफी और मुआवज़े की मांग कर रहा है। इस कदम का उद्देश्य अफ्रीका के आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और अपने नागरिकों के लिए बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित करना है। Cosatu का यह कदम अफ्रीका में विदेशी निवेश और उपनिवेशवाद के परिणामों पर चल रही बहस में एक महत्वपूर्ण योगदान है।