मई में समग्र मुद्रास्फीति दर में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन मूलभूत मुद्रास्फीति सितंबर 2024 के बाद उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है। यह दर्शाता है कि वस्तुओं और सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति आने वाले महीनों में नीतिगत निर्णयों को प्रभावित कर सकती है। मूलभूत मुद्रास्फीति में वृद्धि खाद्य और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव को छोड़कर, अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में लगातार वृद्धि को दर्शाती है। यह केंद्रीय बैंक के लिए एक चिंता का विषय है, जो मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए प्रयासरत है। इस स्थिति से उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। सरकार और केंद्रीय बैंक इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
