अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, तांबे की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद, 2035 तक वैश्विक तांबे की प्राथमिक आपूर्ति में 25% की कमी हो सकती है। यह कमी नए परियोजनाओं के विकास की गति और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती मांग के कारण आने की संभावना है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि नए तांबे के भंडार को तेजी से विकसित नहीं किया गया, तो ऊर्जा परिवर्तन के लक्ष्य खतरे में पड़ सकते हैं। विशेष रूप से, इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में तांबे की मांग तेजी से बढ़ रही है। आपूर्ति में संभावित कमी से कीमतों में और वृद्धि हो सकती है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को अपनाने में बाधा आ सकती है। इसलिए, तांबे की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तत्काल निवेश और नीतियों की आवश्यकता है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकारों और उद्योग को मिलकर काम करना होगा।