पुरानी प्ल्ज़ेन में पली-बढ़ी मैरी शुस्त्रोवा ने अपने परिवार के पीढ़ियों से चलाए आ रहे खेत के बारे में बताया। उन्होंने जर्मन कब्जे, अनाज को छिपाने और द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में अमेरिकी सैनिकों के आगमन को याद किया। बाद में, उन्हें कम्युनिस्ट शासन के दबाव का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उनके परिवार को घर और खेत दोनों से हाथ धोना पड़ा। उनके अनुसार, खेत को पहले ध्वस्त कर दिया गया, जिससे एक खाली जगह बन गई, और अंततः उसे पार्किंग स्थल में परिवर्तित कर दिया गया। यह घटना कम्युनिस्ट शासन के दौरान संपत्ति के ज़ब्तीकरण और व्यक्तिगत नुकसान का एक दुखद उदाहरण है। मैरी शुस्त्रोवा की यादें उस समय की कठिन परिस्थितियों और उनके परिवार के जीवन पर इसके प्रभाव को दर्शाती हैं। यह कहानी इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर की गवाह है।