वामपंथी दल के नेता पाउलो रायमुंडो ने प्रधानमंत्री से श्रम सुधार पैकेज वापस लेने की चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह पैकेज केवल दक्षिणपंथी दलों के हितों को साधने वाला है। रायमुंडो ने इस सुधार को श्रमिक विरोधी बताया है और सरकार पर पुनर्विचार करने का दबाव बनाया है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की प्रभावशीलता पर संदेह जताया है। ओबामा ने समझौते के दीर्घकालिक परिणामों को लेकर चिंता व्यक्त की है। इस स्थिति से वैश्विक राजनयिक परिदृश्य में तनाव बढ़ सकता है। फिलहाल, दोनों देशों के बीच वार्ता जारी है, लेकिन भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।