सुलेमान करीम ने मडलंघा आयोग के समक्ष अपनी कार्यवाही को गोपनीय रखने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि एक अज्ञात बीमारी के कारण वह कई निर्धारित आयोग की पेशियों में शामिल नहीं हो पाए। करीम का तर्क है कि उनकी चिकित्सा गोपनीयता की रक्षा के लिए कार्यवाही को बंद दरवाजों के पीछे रखा जाना चाहिए। आयोग उनकी अनुपस्थिति और गोपनीयता की आवश्यकता पर विचार कर रहा है। यह मामला सार्वजनिक सुनवाई और व्यक्तिगत स्वास्थ्य अधिकारों के बीच संतुलन पर प्रकाश डालता है। करीम की याचिका पर आयोग का निर्णय महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह भविष्य के समान मामलों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है। आयोग जल्द ही इस मामले पर फैसला सुनाएगा।