कोलंबिया में एक लेख के अनुसार, अधिकांश बुद्धिजीवी सेपेडा को वोट देने और डे ला एस्प्रीला को लेकर चिंतित हैं। हालांकि, यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या बौद्धिक होना राजनीतिक समझदारी की गारंटी है। लेख में तर्क दिया गया है कि बुद्धिजीवियों का मत अन्य नागरिकों के मत से अधिक महत्वपूर्ण नहीं होना चाहिए। यह मुद्दा कोलंबियाई समाज में बुद्धिजीवियों की भूमिका और प्रभाव पर बहस को जन्म देता है। 'ला सिल्ला वाकिया' नामक प्रकाशन में प्रकाशित इस लेख ने इस विषय पर चर्चा छेड़ दी है। यह लेख सभी नागरिकों के मतों की समानता पर जोर देता है, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो। कोलंबिया में आगामी चुनावों के संदर्भ में यह बहस महत्वपूर्ण है।
