कोलंबियाई लेखक अबेलार्डो दे ला एस्प्रीला पर एक लेख ‘ला सिला वाकिया’ में प्रकाशित हुआ है। लेख में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में चुप्पी और व्यंग्य की प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला गया है। लेखक का मानना है कि इस सरकार के दौरान कुछ न कहना, अवाक रहना और Kraus की शैली में व्यंग्य करना आसान होगा। यह टिप्पणी कोलंबिया की राजनीतिक स्थिति पर एक तीखी नज़र डालती है। यह सरकार की नीतियों और कार्यों के प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है। लेख में राजनीतिक टिप्पणी और सामाजिक आलोचना के महत्व पर ज़ोर दिया गया है, ख़ासकर ऐसे समय में जब बोलने की आज़ादी सीमित हो सकती है। यह वर्तमान शासन के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक सवालिया निशान भी उठाता है।

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