कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव से पहले, अमेरिका में रहने वाले एक जाने-माने कार्यकर्ता बेटो कोरल फ्लोरिडा गए थे। उन्होंने वहां अपने साथी कोलंबियाई लोगों से अपील की कि वे दक्षिणपंथी उम्मीदवार अबेलार्डो दे ला एस्प्रीला को वोट न दें। कोरल ने मियामी में मतदान केंद्रों के बाहर बैनर लिए, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि यह अमीर वकील, जिसे डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन प्राप्त था, “तुम सबको डिपोर्ट करने में मदद करेगा।” इस कार्रवाई के बाद, कोरल को अमेरिका से बाहर कर दिया गया, जिससे राजनीतिक कार्यकर्ताओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठने लगे हैं। यह घटना कोलंबियाई चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप और राजनीतिक आलोचना के दमन से संबंधित चिंताओं को उजागर करती है। कोरल का मकसद मतदाताओं को संभावित परिणामों के बारे में जागरूक करना था, लेकिन इसके परिणामस्वरूप उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला है।

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