हाल ही में मोम्बासा में आयोजित ‘ऑर ओशन कॉन्फ्रेंस’ में प्रस्तुत एक नए अध्ययन से पता चला है कि वैश्विक प्रवाल भित्तियों का लगभग एक तिहाई हिस्सा, यानी 166,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक लचीला है। यह अध्ययन वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी (WCS) और ऑस्ट्रेलिया के मैक्वेरी विश्वविद्यालय द्वारा किया गया है। इस शोध के अनुसार, ये प्रवाल भित्तियाँ समुद्री जल के तापमान में वृद्धि को झेलने में सक्षम हैं। यह निष्कर्ष अंतर सरकारी पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) के उन पूर्वानुमानों से अलग है, जो बताते हैं कि वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने पर 70 से 90 प्रतिशत प्रवाल भित्तियाँ नष्ट हो जाएँगी। केन्या के वासिनी-मक्विरो द्वीप पर स्थानीय समुदायों द्वारा किए जा रहे संरक्षण प्रयासों को भी अध्ययन में उजागर किया गया है, जहाँ स्थानीय मछुआरे और स्वयंसेवक मिलकर प्रवाल भित्तियों की रक्षा कर रहे हैं। हालांकि, अध्ययन में यह भी चेतावनी दी गई है कि इन लचीला प्रवाल भित्तियों में से केवल 28 प्रतिशत को ही सक्रिय रूप से संरक्षित किया जा रहा है, इसलिए संरक्षण प्रयासों को और तेज करने की आवश्यकता है।
