संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक घासभूमि पर बढ़ते खतरों के प्रति आगाह किया है। ये घासभूमि पृथ्वी की सतह का आधा से अधिक भाग घेरती हैं और दो अरब लोगों की आजीविका का आधार हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण इन घासभूमियों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। तापमान में वृद्धि और वर्षा के पैटर्न में बदलाव से घासभूमि की उत्पादकता कम हो रही है। इससे पशुधन पालन और खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि घासभूमियों के संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में खाद्य संकट से बचा जा सके। सतत भूमि प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।
