बर्लिन शहर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के लिए तैयार हो रहा है, विशेष रूप से आगामी गर्मी की लहरों को ध्यान में रखते हुए। यहाँ पेड़ों पर कीटों, विशेष रूप से 600,000 करवान तौक्का (karvan toukka) के हमले का खतरा बढ़ गया है। ये कीट पेड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे शहर के हरित क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। शहर प्रशासन इस स्थिति से निपटने के लिए उपाय कर रहा है, क्योंकि गर्मी की लहरों के दौरान पेड़ों का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले पारिस्थितिक परिवर्तनों का एक उदाहरण है। बर्लिन में अब अंधेरे से नहीं, बल्कि इन कीटों से डरने की बात है। शहर के पर्यावरण पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।