यूरोपीय संघ की कोपरनिकस जलवायु सेवा के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी यूरोप में तापमान औद्योगिक युग के सितंबर के औसत से 2.51 डिग्री सेल्सियस अधिक था। यह लगातार दूसरे महीने है जब पृथ्वी का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की जोखिम सीमा से ऊपर चला गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक खतरनाक संकेत है और तत्काल जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता को दर्शाता है। इस वृद्धि का कारण ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन माना जा रहा है। यह स्थिति वैश्विक स्तर पर मौसम के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है और चरम मौसम की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ा सकती है। कोपरनिकस जलवायु सेवा लगातार पृथ्वी के तापमान की निगरानी कर रही है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन कर रही है। यह डेटा जलवायु नीतियों को बनाने और लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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