हार्वर्ड और एनआईएच के विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के कारण पराग कणों में बढ़ती हुई जलन और एलर्जी के मौसम में बदलाव पर चेतावनी जारी की है। पहले जहां एलर्जी केवल वसंत ऋतु तक सीमित थी, अब यह पूरे वर्ष रहने वाली समस्या बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पराग का उत्पादन बढ़ गया है और यह अधिक हानिकारक हो गया है। इससे एलर्जी से पीड़ित लोगों को सर्दियों में भी परेशानी हो सकती है। इस स्थिति से बचने के लिए, एलर्जी पीड़ितों को सर्दियों में भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों ने एलर्जी के लक्षणों से बचने के लिए उचित उपाय करने पर भी जोर दिया है। यह अध्ययन एलर्जी के बढ़ते मामलों और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंध को दर्शाता है।