एक धर्मगुरु ने चर्च के नेताओं से गैर-पक्षपातपूर्ण रहने और राजनीतिक समर्थन से बचने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि चर्च की आध्यात्मिक अखंडता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है, और नेताओं को राजनीतिक विवादों से दूर रहना चाहिए। धर्मगुरु ने चर्च को सभी विश्वासियों के लिए एक सुरक्षित स्थान बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, चाहे उनकी राजनीतिक संबद्धता कुछ भी हो। राजनीतिक समर्थन देने से चर्च में विभाजन और अविश्वास पैदा हो सकता है। उनका तर्क है कि चर्च का ध्यान बाइबल के सिद्धांतों पर केंद्रित होना चाहिए, न कि राजनीतिक एजेंडों पर। यह आग्रह धार्मिक संस्थानों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के महत्व को दर्शाता है। इस तरह के रुख से चर्च की विश्वसनीयता और नैतिक अधिकार बना रहेगा।

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