जकार्ता में 12 जून 2026 को छात्रों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों को संभालने में सेना की भागीदारी पर नागरिक समाज संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। प्रदर्शनकारी, एमएच थामरीन रोड, मध्य जकार्ता में एकत्रित हुए थे। नागरिक समाज का कहना है कि छात्रों को शत्रु राष्ट्र नहीं माना जाना चाहिए। सेना की भागीदारी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, और इस मामले में पारदर्शिता की मांग की जा रही है। संगठनों का मानना है कि विरोध प्रदर्शनों को संभालने का कार्य पुलिस का है, न कि सेना का। इस हस्तक्षेप से नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस मुद्दे पर आगे जांच और स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।