सिगरेट उत्पादन सीमा में प्रस्तावित वृद्धि पर विशेषज्ञों ने कड़ी आलोचना की है। उनका मानना है कि इससे कम श्रेणी की मशीनी सिगरेट बनाने वाली कंपनियां कम कर दरों का लाभ उठाती रहेंगी, भले ही उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ती रहे। इस कदम से सरकार के राजस्व में कमी आने की आशंका है, क्योंकि कंपनियां उच्च कर श्रेणी में जाने से बच जाएंगी। आलोचकों का तर्क है कि यह नीति सिगरेट के सेवन को कम करने के बजाय प्रोत्साहित कर सकती है। सरकार का उद्देश्य उत्पादन को विनियमित करना बताया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अपने विपरीत परिणाम दे सकता है। इस मुद्दे पर आगे विचार-विमर्श और नीति में संशोधन की मांग की जा रही है ताकि सरकारी राजस्व सुरक्षित रहे और सार्वजनिक स्वास्थ्य को नुकसान न पहुंचे। यह बदलाव सिगरेट उद्योग में कर चोरी को भी बढ़ावा दे सकता है।