तीन जुलाई, 1940 को अल्जीरिया के मेर्स-एल-केबीर बंदरगाह पर एक भीषण हमला हुआ, जिसमें फ्रांसीसी नौसेना के जहाजों को नष्ट कर दिया गया। इस हमले में 1,297 फ्रांसीसी नाविकों की जान चली गई। यह हमला नाज़ी या फ़ासीवादी ताकतों द्वारा नहीं, बल्कि मित्र राष्ट्रों के ही एक कठोर निर्णय के परिणामस्वरूप हुआ। ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने फ्रांसीसी बेड़े को नष्ट करने का आदेश दिया था, क्योंकि उन्हें डर था कि यह बेड़ा जर्मनी के हाथों में पड़ सकता है। इस फैसले से फ्रांस और ब्रिटेन के बीच संबंधों में तनाव बढ़ गया। इस घटना को मेर्स-एल-केबीर का नरसंहार कहा जाता है और यह द्वितीय विश्व युद्ध की एक विवादास्पद घटना बनी हुई है। इस हमले ने मित्र राष्ट्रों के बीच विश्वासघात और युद्ध की भयावहता को उजागर किया।