हाल के भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, तेल बाजार में अपेक्षा से अधिक स्थिरता देखी जा रही है। कच्चे तेल की कीमतें लगभग 94 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर बनी हुई हैं, हालांकि ईरान समझौते की घोषणा के बाद में थोड़ी गिरावट आई। विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थिरता का मुख्य कारण चीन है। चीन वैश्विक बाजार में तेल की खरीद कम कर रहा है और अपने रणनीतिक भंडारों का उपयोग बढ़ा रहा है। इस कदम से तेल की कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिल रही है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह स्थिति दीर्घकालिक नहीं है और भविष्य में कीमतें बदल सकती हैं। ईरान द्वारा समझौते को अस्वीकार करने की संभावना भी कीमतों को प्रभावित कर सकती है।