हाल ही में शी जिनपिंग की उत्तर कोरिया यात्रा के दौरान, दोनों देशों के बयानों में परमाणु हथियारों या उनके निरस्त्रीकरण का कोई उल्लेख नहीं किया गया। विश्लेषकों का मानना है कि चीन परमाणु हथियारों के मुद्दे को कम महत्व दे रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसने उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु शस्त्रागार को स्वीकार कर लिया है। मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हुई शिखर बैठक के बाद से ही, पर्यवेक्षक बीजिंग के रुख में संभावित बदलावों पर अटकलें लगा रहे थे। चीन का यह मौन रुख, उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के प्रति उसकी रणनीति में बदलाव का संकेत हो सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि चीन अब इस मुद्दे को कैसे संभालेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन अभी भी कोरियाई प्रायद्वीप में स्थिरता चाहता है, लेकिन वह उत्तर कोरिया पर परमाणु हथियार छोड़ने के लिए दबाव डालने से हिचकिचा रहा है।