यूरोपीय संघ के प्रमुख अधिकारी मध्य अक्तूबर में यह तय करेंगे कि चीन के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने हैं या नहीं। जर्मनी और फ्रांस पहले से ही एक नए सुरक्षात्मक उपकरण पर काम कर रहे हैं। यह कदम चीन के साथ किसी संभावित संघर्ष की स्थिति में उठाया जा सकता है। बर्लिन का मानना है कि संघर्ष की स्थिति में चीन को यूरोपीय बाज़ार से बाहर करना आवश्यक है। यह निर्णय यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच तनाव पैदा कर सकता है, क्योंकि चीन यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार है। इस संभावित प्रतिबंध से चीन, जर्मनी और फ्रांस के बीच संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। इस मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।