हाल ही में अफ्रीका में ताइवान पर चीन के बढ़ते प्रभाव के संकेत मिले हैं। ‘ऑर ओशन’ सम्मेलन में ताइवान के प्रतिनिधियों को एक विशेष कार्यक्रम में प्रवेश करने से रोक दिया गया। आयोजकों ने ताइवान के पासपोर्ट को वैध यात्रा दस्तावेज के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया। यह घटनाक्रम चीन द्वारा ताइवान को अंतर्राष्ट्रीय मंचों से अलग-थलग करने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अफ्रीका में अपने राजनयिक प्रभाव का उपयोग करके ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है। इस घटना ने ताइवान की अंतर्राष्ट्रीय स्थिति और चीन के साथ उसके संबंधों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह कदम ताइवान की राजनयिक स्वतंत्रता को सीमित करने की चीन की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
