चीन ने इतिहास रचा है, क्योंकि उसने पहली बार एक पुन: प्रयोज्य अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक ज़मीन पर उतारा है। यह उपलब्धि उसे स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन जैसी अमेरिकी कंपनियों की पंक्ति में ला खड़ा करती है, जो पहले से ही इस तकनीक का उपयोग कर रही हैं। यह ‘चू-च्युए-3’ रॉकेट की दूसरी उड़ान थी, क्योंकि पहली उड़ान में यह फट गया था। इस सफल लैंडिंग से चीन के लिए बार-बार रॉकेट का उपयोग करने और लॉन्चिंग की लागत को कम करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यूरोपीय संघ भी कई परियोजनाओं के माध्यम से पुन: प्रयोज्य रॉकेट का परीक्षण कर रहा है, जिसमें ‘थेमिस’ सबसे आगे है, साथ ही फ्रांस की ‘माईस्पेस’ और जर्मनी की ‘रॉकेट फैक्ट्री ऑग्स्बर्ग’ ने भी प्रगति की है। यह घटना अंतरिक्ष अन्वेषण में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है।

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