चिली में गरीबी कम होने के आँकड़ों पर नए सवाल उठ रहे हैं, खासकर राज्य द्वारा दी जाने वाली सहायता और रोज़गार से होने वाली आय के योगदान को लेकर। पाऊला पोब्लेट ने इस मुद्दे पर विश्लेषण करते हुए बताया है कि महामारी के दौरान सहायता और बाद में रोज़गार एवं वेतन में सुधार, दोनों ने ही गरीबी घटाने में अहम भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि सिर्फ़ नौकरी मिलना ही गरीबी से बाहर निकलने की गारंटी नहीं है। बच्चों वाले परिवारों के लिए यह और भी मुश्किल है क्योंकि उनके खर्चे ज़्यादा होते हैं और स्थिर नौकरी पाना भी चुनौतीपूर्ण होता है। इसलिए, गरीबी को कम करने के लिए राज्य द्वारा दी जाने वाली सहायता और स्थिर रोज़गार दोनों का होना आवश्यक है। ये विश्लेषण 2024 के कैसेन सर्वेक्षण के नतीजों के बाद सामने आया है और यह दिखाता है कि गरीबी कम करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।