एक समिति ने चेतावनी दी है कि यदि राजकोषीय सुधार नहीं किए गए, तो 2027 तक देश का सकल ऋण जीडीपी का 66.6% तक पहुँच सकता है। समिति के अनुसार, 2026 में देश का शुद्ध ऋण जीडीपी का 61% तक पहुँच जाएगा, जो अब तक का सबसे उच्च स्तर है। वित्त मंत्रालय के अनुमान से परिचालन और निवेश पर होने वाला खर्च 39.6 खरब डॉलर अधिक होने का अनुमान है। यह स्थिति देश की आर्थिक स्थिरता के लिए चिंताजनक हो सकती है। समिति ने सरकार से तत्काल राजकोषीय सुधार करने का आग्रह किया है ताकि ऋण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके। इस सुधार में खर्चों में कटौती और राजस्व बढ़ाने के उपाय शामिल हो सकते हैं। यदि समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो देश को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।